बैठकर(आध्यात्मिक)-64
बैठकर चरणों में तेरे
क्या कुछ नहीं पाया मैंने
लेकिन तेरी याद सताती
कैसे समझाऊँ तुझको
मेरे दाता फिर से मुझको
अपने पास बिठाओ तुम
केवल अपनी प्यारी चितवन
एक बार फिर डालो तुम
कैसे शक्तिपात कर देते
फिर से वही नज़ारा दो
सिर पर रख कर हाथ मेरे तुम
जन्नत फिर से दिखला दो
👣🙏🏻
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