तुमको(आध्यात्मिक)-60
तुमको जानूँ तुमको ही मानूँ
बस इतनी मुझ पै दया करना
तुम पर ही हो विश्वास अटल
शक्ति भर इतनी दे देना
मन-वचन-कर्म अरु छाया से
सत्कर्म बनें-करुणा बिखरे
ऐसे गुण भरना अन्तर में
तेरी ही प्रतिध्वनि निकले
तुम प्राण पियारे हो मेरे
बस ध्यान तुम्हारा बना रहे
नख से सिर तक में तेरी छवि
मेरे अन्तर में दिखती ही रहे
👣🙏🏻
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