फ़ितरत(सामाजिक)-44

पहचान प्रतिष्ठा

पद सम्मान

क्या कुछ....

नहीं पाना चाहते सभी लोग

जबकि....

जानते हुये भी कि

थोड़े समय का खेल है ये सब

कुछ भी साथ नहीं गया आज तक

और तो और

काया भी यहीं छोड़कर

जानी पड़ती है

जान-पहचान वाले

यहॉ तक कि रिश्तेदार भी

जीते जी भूल जाते हैं

अगर आप काम के नहीं

क्यों कि.....

ये फ़ितरत है दुनिया की

ये फ़ितरत है समाज की

इसे तुम बदल नहीं सकते

कोई बदल भी नहीं सका है

फिर.....

क्यों भागते हैं

इस सबके पीछे

आख़िर क्यों ?

          💔💔🖤💔💔


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