बारिश(आध्यात्मिक)-49

बारिश में भीगते

पहुँच गये तेरे दर पर

देखा....तो लगा कि

जैसे.....,

तुम इन्तज़ार में ही थे

देखकर तुमको...

तबियत कुछ अच्छी सी

होने लगी

शायद.....

कुछ ताक़त तुम

बिन देखे ही दे रहे थे

मन में तरंगें अचानक

उठने लगीं

मेरे दाता....

मेरे प्रीतम.....

कैसे करूँ शुकराना 

जो तुम लगातार दिये

चले जा रहे हो

एक ताक़त - एक हौसला-एक जज़्बा 

कुछ कर गुज़रने का

एक असीम आनन्द के साथ

एक नई दुनिया को छूने का

शुक्रिया....

हर पल....

आपका.....

मेरे प्रीतम-मेरेदाता-मेरे गुरुवर

                   👣🙏🏻



टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

याद आपकी-428

दृष्टा-425

कर्म -426