परिवर्तन(व्यक्तिगत)-38
परिवर्तन
जीवन और प्रकृति का नियम है
ज़िन्दगी की दौड़-धूप के बाद
अब आराम में आ गया हूँ मैं
परिवार के साथ समय बिताना
अच्छा लगता है.......!
घर-परिवार....
घर यानी ख़ूनी रिश्ते
परिवार यानी सब(इंसान,पशु,पक्षी,जीव,जन्तु)
सभी मेरे अपने
ख़ुशी का पर्याय हैं
सभी तो अपने हैं
न जाने पिछले कितने जन्मों में
बार-बार मिलते रहे होंगे
तभी तो वर्तमान जीवन में भी
सभी लोग मिलते और बिछुड़ते रहते हैं
सृष्टि का यही नियम है
परिवर्तन......!
परिवर्तन........!
और परिवर्तन........!
💔💔🖤💔💔
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