ऑधियॉ(आध्यात्मिक)-51

ऑधियॉ अब चल पड़ी

मौसमे बहार की

कौन जाने अब किधर से

तेज़ आयेगी हवा भी

थम जायेगा ये तूफ़ान 

थम जायेंगी ऑधियॉ

मन में जो तूफ़ान उठा है

हर पल तेरी चाहत का

चरणों में सजदा करने का

तेरे चरण दबाने का

शिद्दत से इक हूक उठी थी

केवल तुझको पाने की

इस जीवन में पूरी होगी

अभिलाषा ये छोटी सी

नहीं पता.....

ये सब कुछ मुझको

ये सब तो तुम ही जानते हो

कुछ तो बोलो प्यारे दाता

केवल....

तुम ही मुझको जानते हो

तुम ही सब पहचानते हो

कुछ तो बोलो..,,,

कुछ तो बताओ...,

दाता मेरे प्यारे गुरुवर.,.,,

          👣🙏🏻


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