दिल में(आध्यात्मिक)-127

दिल में जो शमा जलाई है 

हरवक्त जलाये रखियेगा

चरणों में सजदा बना रहे

इतनी सी रहमत करियेगा

रोम-रोम में अपनी यादों की

ख़ुशबू बिखराते रहियेगा

अब्सार के ज़रिये इज़हार-ए-मुहब्बत 

हमको करते रहियेगा

गिरें मुहब्बत के ना ऑसूँ 

इतनी हिम्मत देते रहियेगा

झँझावातों से घबरा ना जायें

ताक़त बनकर रहियेगा

ज़िन्दगी जितनी भी दी है

क़र्ज़ा चुकवाते रहियेगा

भार किसी का सिर पर ना हो

छोटी सी गुज़ारिश समझियेगा

                  👣🙏🏻



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