शुकराना(व्यक्तिगत)-116
सालों-साल गुज़र जाते हैं
इक-दूजे का सहारा बनने में
कभी वो रूठें - कभी मैं रूठूँ
अच्छा लगता था मनाने में
लड़ते-भिड़ते,प्यार जताते
कैसे गुज़र गये ये साल
बच्चे भी अब बड़े हो गये
ठुमक-ठुमक चलते थे चाल
बेशक ? उम्र बढ़ी है अब तक
बचपन फिर भी ज़िन्दा है
उतनी उछल-कूद ना कर पाते
पर मन तो कुलाँचे भरता है
अढ़तीस साल साथ हैं गुज़रे
देती हूँ तुम्हें मुबारकबाद
मिलजुल कर हम करते रहें
भगवन जो हमसे करायें काज!!
शुकराना
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शुकराना उस सत्ता का जिसने ये सब ख़ुशियाँ दीं
ख़ुशी में शामिल हुये जो अपने
शुकराना उन सबका भी
भले ही माध्यम फ़ोन रहा हो
व्हाट्सएप हो या फ़ेसबुक ही
दुआयें हमको मिलीं हैं सबकी
शुकराना उन प्यारों का भी
ख़ुशी में शामिल जो ना हो पाये
दिल से दुआयें उन सबको भी
गुरुसत्ता सबकी भरे झोलियॉ
जिसने भी हमें बधाई दी,दुआयें दीं
आप सभी का दिल से आभार व नमन
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