मैं तेरे चरणों(आध्यात्मिक)-109 

मैं तेरे चरणों का फूल हूँ,और तेरे दर की धूल हूँ

साये में तेरे रह सकूँ,एक ऐसी रहगुज़र में हूँ

मेरा आज तुमसे सँवर गया,चरणों में आके बस गया

अब तू जो चाहे निखार दे,मैं तेरी फ़स्ल-ए-बहार हूँ

कहते हैं तुझको पीर भी,तूने कितने सँवारे आज भी

मुझको भी आज सँवार दे,तेरे दर पै पड़ा मैं आज हूँ

तुम ख़ुदा के भेजे दूत हो,ख़ुदा से तुम भी कम नहीं 

जो चाहो मुझको बना दो तुम,तक़दीर तेरे हाथो में है

                                    👣🙏🏻

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