सारी व्यवस्था(आध्यात्मिक)-121
सारी व्यवस्था आपने आकर
कितने अच्छी तरह संभाल ली
फिर भी मन की "मैं" ना जाती
सोचूँ मुझसे ही दुनिया चलती
ज़र्रा-ज़र्रा बयॉ कर रहा
आप वहॉ पर हैं मौजूद
कहॉ-कहॉ से भीड़ जुटा दी
उत्साह भरा था सबमें खूब
किन शब्दों में बयॉ करूँ में
अचरज भी-अनुभूति भी
सजदा करूँ शुकराना करती
चरणों में तुम्हारे सिर को रखती
जनम-जनम के पापों की अब
ऐसे ही धुलाई करते रहना
जैसी भी हूँ तुम्हारी हूँ बस
मुझको अपना बनाये रखना
👣🙏🏻
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