कैसे कहू(आध्यात्मिक)-105

कैसे कहूँ कि तुम मुझसे दूर हो गये हो

रहते हो आस-पास ही महसूस होता है मुझे

जब-जब पुकारा है तुम्हें दिल की गहराइयों से

बिन बोले भी सदा पहुँची तुम्हारे पास तक

बेशक...रूबरू होते नहीं नज़दीक तुम

रूह से रूह का रिश्ता तुम्हारा है अलग

रूह में मुझको बिठाकर प्यार से दुलार कर

मुझको तुम जोड़े ही रखना प्रेम के इस पाश में 

                         👣🙏🏻

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