मन की बगिया(आध्यात्मिक)-113

झलक तुम्हारी दिखते ही

मन की बगिया खिल जाती है

लगता है गुरु और माता

दोनों  की डोली आती है

देख के गुरुसत्ता की सूरत

सबका मनोबल बढ़ता है

प्यारी निगाहें पड़ती हैं जब

श्रद्धामय सब हो जाता है

जोश बराबर भरते रहना

आगे सबको बढ़ाते रहना

सबके सिर हाथ तुम्हारा

अपने गले लगाते रहना

आज तुम्हारे तप-बल से 

सब आगे बढ़ते जाते हैं

शक्ति तुम्हारी काम है करती

तब सभी झूमते जाते हैं

               

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