अब तो(आध्यात्मिक)-126

अब तो आ भी जाओ मेरे दाता

बहुत सताया है तुमको मैंने 

दुनिया से जो कह ना पाती

वो तुमको खूब सुनाया है मैंने 

साधक की परिभाषा क्या है

मुझको अब भी समझ न आती

जब भी याद सताती है तुम्हारी

लिखने लग जाती ये प्रेम की पाती

जितने जो पल भी साथ में गुज़रे 

उस हर पल को याद मैं करती हूँ

ध्यान न करना मुझको आता

अब यही ध्यान मैं करती हूँ

जप-तप तुमने खूब सिखाया

शिष्टाचार भी खूब बतलाया

सब-कुछ भूल-भाल कर अब तो

याद तुम्हें ही करती-रहती हूँ

                 👣🙏🏻


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