गुरुवर दाता(आध्यात्मिक)-128

गुरुवर दाता तुम्हें छोड़कर 

कुछ भी सोच नहीं पाती

इसीलिये मैं इधर-उधर की 

बातें कुछ भी ना कर पाती

इक पल को भी याद न छूटे 

ऐसे हमेशा रखना मुझको

ध्यान तुम्हारा बना रहे 

कुछ ऐसे पल देना मुझको

अन्तर के पट खोल के अपने 

दरश दिखा देना मुझको

मेला झमेला हटा के रखना 

छुपाके रख लेना मुझको

मन जो सोचे अच्छा सोचे 

जिभिया भी अच्छा बोले

कर्म बन पड़े अच्छे ही बस 

ऐसे तुम रखना मुझको

              👣🙏🏻

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