जीवन(सामाजिक)-111

जीवन में जीवट का होना 

कितना ज़रूरी होता है

जीवट के अभाव में बन्दा

बेचैन हुआ ही करता है

बड़े-बड़े शहरों के बन्दे सारे

कितनी-कितनी मेहनत करते हैं

चिड़ियों की आवाज़ से उठते हैं

और काम पर अपने चल पड़ते हैं

पेट की ख़ातिर ही हर बन्दा

काम से अपने जुड़ा हुआ है

दौड़-भाग कर जीवन की

वो नैया पार किया करता है

बालकनी में सुबह-सुबह जब

कभी खड़ी हो जाती हूँ मैं 

आगे-पीछे बैग लटकाये हँसते-जाते

बच्चों-बड़ों को देखा करती हूँ मैं 

थककर चूर मुँह लटकाये आते 

 रात को सबको देखा करती हूँ 

जीवन में दौड़-दौड़ कर मर जाना

सबका क्या? ये ही जीवट सोचती हूँ

                💔💔🖤💔💔

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