मैली चुनरिया(आध्यात्मिक)-119
मैली चुनरिया कैसे धोऊँ,
भगवन मुझे बताओ तुम
लगे है धब्बे चाहे जितने,
मल-मल उन्हें छुड़ाओ तुम
तुमसे जुड़कर गन्दी चुनरिया
,कैसे उसको ओढ़ूँ मैं
जब तक तुम ना करो धुलाई,
पास में कैसे आऊँ मैं
सबने इस पर छींटे डाले,
तरह-तरह के रँग बिखराये
पीछे से खेली थी होली,
सामने कोई आ ना पाये
खड़े सामने देख रहे तुम,
पीछे होली खेल रहे सब
मैं तो छुपी थी गोद में तेरे
,रँग उड़ाते थे वे जब-जब
👣🙏🏻
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें