राह दिखाने(आध्यात्मिक)-145
राह दिखाने दुनिया को तुम,
आये और आकर चले गये ।
अपने सब बच्चों को काम बता,
और मशाल थमाकर चले गये ।
--वही काम और वही मशाल,
की छाया में दुनिया सारी है ।
सदबुध्दि का मंन्र जो दे गये,
वो सभी का जपना जारी है ।
--जीते थे सब अकेले-अकेले,
पूजा-पाठ भी अकेले-अकेले ।
सामूहिकता की बात कह गये,
वो काम अभी भी जारी है ।
--मेरे गुरुवर कितना कुछ तुम,
क़दम-क़दम पर बतलाते गये ।
जीवन में उन सबको लेकर,
चलना अब भी सबका जारी है ।
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