तुम्हीं तो मेरे(आध्यात्मिक)-135
तुम्हीं तो मेरे सब कुछ हो दाता,
मेरी ये नैया सँभाले रखना ।
चाहूँ न तुमसे कुछ और दाता,
शरण में अपनी बनाये रखना ।
--शरण में आई हूँ जब से तेरी,
दशा सुधारी है तुमने मेरी ।
यही मैं तुमसे माँगू हे गुरुवर,
ऊँगली हमेशा पकड़े ही रहना ।
--किसी को दुख ना पहुँचे मुझसे,
ख़्वाबों में मेरे रहो तुम हरदम ।
छवि जो दीखे तेरी ही दीखे,
परछाईं बनकर खड़े ही रहना ।
--नज़र तुम्हारी पड़ती रहे बस,
रहमोकरम पर चलती रहूँ मैं ।
अन्तिम समय तक मुझको निभाना,
प्राणों को मुट्ठी में ले के चलना ।
👣🙏🏻
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