क्या ही अजूबा(आध्यात्मिक)-153

क्या ही अजूबा हो जाता है

जब शक्ति तुम्हारी मिलती है

जो चल ना पाते पॉवों से

उनकी राहें चल पड़ती हैं

बोल न पाते हैं जो बन्दे

वे गूँगे भी बोला करते हैं

मरणासन्न पड़े जो घर में 

वे उठकर बैठा करते हैं

तेरी ताक़त और तेरे इशारे

पर चलती दुनिया सारी है

तू ना चाहे किसी तरह भी

बन्द हो जाती दुनियादारी है

अपनी इस शक्ति से बराबर

कुछ छींटे मुझको देते रहना

लुढ़क-पुढ़क मैं जाऊँ कभी तो

तन और मन को सँभाले रखना

                 👣🙏🏻

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

याद आपकी-428

दृष्टा-425

कर्म -426