कुछ दिन पहले(सामाजिक)-137
भगवन मेरे कुछ दिन पहले
आपने भेजा मुझको कुछ
गुणीजनों और ज्ञानियों के मेले में
तरह-तरह के फूल खिले थे
उस आवाजाही के झमेले में
धीरे-धीरे मँच पै आकर सब
लगे थे अपनी बात सुनाने
कुछ तो हँसाकर बात कह दिये
कुछ तो कहकर लगे सुलाने
बिन देखे जो बोल सके
वे भी अपनी बात कह दिये
लिखने के शौक़ीन रहे जो
वो भी अपनी कथा पढ़ दिये
सबको देख के ख़ुद को देखा
मन तो हुआ बड़ा बेचैन
कितना सब ज्ञानी हैं देखो
कितनी मेहनत करते दिन रैन
ये काया कुछ सीख ना पाई
बैठी रही आपके चरणों में
ये जीवन तो नादानी में बीता
सीखना होगा अगले जनम में
👣🙏🏻
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