आ जाओ अब तो दाता(आध्यात्मिक)-148
आ जाओ अब तो दाता,अब सॉझ ढल चुकी है
रात भी अँधेरी अब गहरी होती ही जा रही है
मौन सा है छा गया अब तो चारों ओर
अमावस की रात में चन्दा ना किसी ओर
आहट सी तेरे आने की लगती है बार-बार
दूर गगन के मुझको ना दीखे आर-पार
अब आ भी जाओ प्यारे अब और ना सताओ
आकर के अपनी रूह में इस रूह को बिठाओ
👣🙏🏻
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