निंदा(सामाजिक)-133
निंदा में रस आता है हमको
इसीलिये तो निन्दा करते
कानों को डस्टविन बनाकर
सबको कचरा डालने देते
घर के सामने कोई डाल दे कचरा
उससे हम लड़ने लग जाते
कानों में कोई डाले कचरा
उसको हम ख़ुश होकर सुनते
अपनी बुराई कोई कर दे
सहन नहीं होती वह हमसे
दूसरों की निन्दा का कचरा
कानों में हम हरदम भरते
कर्मों की ये पोटलियॉ हम
कितनी-कितनी बॉधा करते
कैसे खुलेंगी ये पोटलियॉ
ये न कभी हम सोचा करते
👣🙏🏻
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