सॉसों की हर आहट(आध्यात्मिक)-150
सॉसों की हर आहट पर मैं,
तेरा ही नाम लिखा पाती हूँ ।
ऊपर नीचे जब सॉस है जाती,
उस वक़्त तुझे ढूँढा करती हूँ ।
--मन तो मेरा पास है तेरे,
क्या सोचूँ क्या समझूँ मैं ।
दिल में भी आकर बैठे तुम,
कुछ भी ना कर पाती मैं ।
--तन ही केवल बचा है मेरा,
याद में तेरी पड़ा रहता है ।
ऑंख निगाहें सब कुछ ही तो,
तेरी ही राह तका करता है ।
--सब कहते हैं बार-बार मैं,
एक ही बात कहा करती हूँ ।
कर भी क्या सकती हूँ मैं,
तो तेरा ही नाम रटा करती हूँ ।
---तुझको ही याद किया करती हूँ।
👣🙏🏻
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