दुखों से पहचान(आध्यात्मिक)-141

दुखों से पहचान क्या बढ़ी कि तुम ही मिल गये

सुखों से दोस्ती होते ही क्यों तुम  दूर हट गये

तुम जानते सभी को कि कब कौन कैसा होगा

तभी तो आगे बढ़कर तुम दुखों में थाम लेते

सुखों में बाढ़ होती तमाम रिश्तों व दोस्तों की

तभी तो तुम अकेले मुझको यूँ ही रहने देते

आते रहा करो तुम यूँ छोड़ो ना अकेले

हरदम ही साथ रहकर तुम लगते भले-भले से

                             👣🙏🏻

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