गुरुवर तुमने(आध्यात्मिक)-152
गुरुवर तुमने जितना घुमाया,
बस उतना ही मैं घूमी हूँ ।
शरण में तेरी रहकर मैं तो,
जाने क्या क्या सीखी हूँ ।
--तीरथ सारे शरण तुम्हारी,
सामने हो मूरतिया तेरी ।
गुरुवर शरणं गच्छामि का,
मंत्र है जपती जिभिया मेरी ।
--मन का चँचल होते जाना,
दिल की धड़कन तेज़ हो जाना ।
और ना जाने क्या-क्या होना,
तेरी शरण में शान्त हो जाना ।
--सारी इन्द्रियॉ मचल-मचल कर,
कितना कुछ शोर मचाती हैं ।
जैसे ही तुम पास में आये,
सारी ख़ुशियाँ पास आ जाती हैं ।
👣🙏🏻
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