मेरे गुरुवर(आध्यात्मिक)-136
मेरे गुरुवर मेरे दाता,तुम अपनाये रखना ।
जब-जब भटकूँ मन से,मन को पकड़े रखना ।
--ये तन तो नहीं क़ाबिल,कुछ कर ना पाता है ।
मन भी तो चँचल है,बस ख़्वाब दिखाता है ।
एक तुम ही हो प्यारे,मुझको बॉधे रखना ।
मेरे गुरुवर------।
--कर्मों का क्या बोलूँ,कुछ याद नहीं मुझको ।
कितना है कष्ट दिया,मेरे कर्मों ने सबको ।
अब तुम ही काटोगे,मेरे कर्मों का घेरा ।
मेरे गुरुवर-----।
---मैं शरण में आई हूँ,शरणागत हूँ तेरी ।
क्या-क्या अपराध हुये,अनजाने में मेरी ।
अब तुम ही बचा सकते,ये जन्मों का फेरा ।
मेरे गुरुवर-----।
👣🙏🏻
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