अश्क़ गिर न जायें(आध्यात्मिक)-147

अश्क़ गिर न जायें इतना ही प्यार कीजिये

पिघल जाये रूह मेरी सॉसों को गर्म कीजिये

आज तो अज़ीज़ मेरे गले लगा ही लीजिये

कौन जाने कब कहॉ रस्ता ही बदला कीजिये

आरज़ू इतनी सी है जीवन भर साथ दीजिये

दर्द जो जिगर में है अल्फ़ाज़ में भर दीजिये

दूर ना जा पायें तुमसे ख़्वाब में ही आ जाइये

की..मुहब्बत इस क़दर बस इसको ना ठुकराइये



                              

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