गुरुवर मेरे सैर करा दी(आध्यात्मिक)-142
गुरुवर मेरे सैर करा दी
तुमने दुनिया ज़हान की
सँग में रहकर हरदम ही
अपने चरणों में पनाह दी
कैसे करते हैं शुकराना
ये भी मुझको आता नहीं
तुम्हारे प्यार के बदले तुमको
कितना क्या मैं बोलूँ पता नहीं
तुम तो बहुत क़रीब हो मेरे
तुमसे कुछ भी छुपा नहीं
तुम तो इतना ध्यान है रखते
कितना कुछ तुमने दिया नहीं
मन में सोचा पूरा कर देते
मुँह को तुम ना खोलने देते
इतनी पकड़ तुम्हारी पक्की
दूर का सोचा तुम पढ़ लेते
👣🙏🏻
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