मातायें अपने बच्चों को(आध्यात्मिक)-184
मातायें अपने बच्चों को,
जब लाड़ लड़ाया करती हैं ।
मेरे लाला,मेरे कान्हा तब,
कहके बुलाया करती हैं ।
--लेकिन मेरे दाता मैं भी,
तुमको क्या कह जाती हूँ ।
प्यारे तो तुम भी मेरे हो,
मेरे कन्हैया कह जाती हूँ ।
--तुमने मुझको क्या-क्या सिखलाया,
अब भी सिखलाते जाते हो ।
कैसे बतलाऊँ प्यारे तुम मुझको,
क्या-क्या नाम दिये जाते हो ।
--नाम दिये तुमने जितने हैं,
वो सब मैं सोचा करती हूँ ।
याद उन्हें कर-करके मैं,
तब खूब हँसा ही करती हूँ ।
--तेरे नाम का दिया औ बाती,
दिल में हमेशा जलती रहे ।
तेरी बॉन्दी हमेशा-हमेशा,
चरणों में तेरे पड़ी रहे ।
.......याद तुझे ही करती रहे ।
👣🙏🏻
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