दूर नहीं जाना है(आध्यात्मिक)-169
दूर नहीं जाना है अब तो,
आस-पास ही रहियेगा ।
इधर-उधर भटकन जब आये,
राह दिखाते रहियेगा ।
--जैसी भी हूँ तेरी ही हूँ,
यही फ़लसफ़ा याद रहे ।
हर कमियों के साथ में मुझको,
अपना बनाये रखियेगा ।
--ख़्वाहिशों के महल नहीं हैं,
इक छोटी सी गुज़ारिश है ।
कुछ भी तुमसे मॉग न पाऊँ,
इतनी सी रहमत रखियेगा ।
--आडम्बर से बची रहूँ मैं ,
प्यार का दिया जलाके रखूँ ।
जब-जब ऑधी तूफ़ा आये,
शम्मॉ जलाये रखियेगा ।
👣🙏🏻
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