आज छकाकर पिला दो(आध्यात्मिक)-197
आज छकाकर पिला दो इतनी,
होली मुझको याद रहे ।
नशा चढ़े जो तेरा मुझपै,
तेरी जैसी चाल रहे ।
रँग-बिरंगे फूलों से तुम,
मुझको तो इतना नहला दो ।
दिल के अन्दर गहरे बैठे,
होली खेले आज दिखा दो ।
तेरी याद और तेरे नशे में,
मैं तो पीती जाउँगी ।
प्रेम का प्याला पी-पीकर,
मैं पागल ही हो जाउँगी ।
मीरा-राधा जैसे खेलीं,
वैसी होली आज खिला दो ।
मेरे मन के मीत मुझे तुम,
अपना सारा राज बता दो ।
लहराती-बलखाती जब मैं ,
सामने तेरे आ जाउँगी ।
हाथ बढ़ाकर थामोगे तुम,
जब मैं बेसुध हो जाउँगी ।
ऐसी अनोखी होली दाता,
तुम आओ खेलो मेरे साथ ।
सदियों तक सब याद रखें,
कैसी होली हुई है आज ।
👣🙏🏻
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