गुरुवर आप हमेशा(आध्यात्मिक)-182
गुरुवर आप हमेशा से कहते
मेरे लिये समय निकालो तुम
पीड़ा और पतन निवारण का
कुछ तो ये काम कराओ तुम
--घर-परिवार,दोस्त औ दुनिया
सबके लिये समय देते हो तुम
गुरु के लिये समय न कहकर
कल पर क्यों टाल देते हो तुम
--मैं-तेरा,तू-मेरी कहकर ही सब
लोग रचा लेते हैं आपस में शादी
बाद में बच्चों को ले लेकर क्यों
लड़ते-झगड़ते हैं-करते हैं बर्बादी
--सब कुछ छोड़ गुरु पर श्रध्दा
हरदम अटल रखा करना तुम भी
जो भी करेंगे अच्छा ही करेंगे
ऐसा सोचकर रहो ख़ुश भी
चिन्ता को तुम दूर भगा दो
सब कुछ तो वही संभालेंगे
कितना सदुपदेश दिया था
प्यार किया था कितना तुमने
10/12/10
👣🙏🏻
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें