दिले शायरी-10
--तेरा रँग सब पर छा जाये
ऐसी रँगत दे दे मौला
तेरी क़लम से निकला जादू
सबकी क़लम चला दे मौला
--बिन बुलाये भी कभी-कभी तो आ भी जाया करो
बार-बार तुम्हें बुलाना ही क्यूँ पड़ता है..मेरे प्रीतम
--धन-दौलत की दीवार हटाकर
प्यार की सीमा बढ़ा दी जाये
इसी तरह दुनिया के सारे रिश्ते
धन-दौलत को बीच में ना लायें
--आते हो जब भी कभी
यूँ ही ख़यालों में तुम मेरे
ऐसा ख़याल आते ही मुझे
कुछ अच्छा सा लगता है
--पेड़ों के झुरमुट से जब
कैसी भी सदा आ जाती है
लगता है चुपके-चुपके से
बस तुम ही आने वाले हो
@शशिसंजय
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