मेरे गुरुवर(आध्यात्मिक)-173

मस्ती का आलम हो जाता

जब ख़्वाब में तुम आ जाते हो

चरणों में बिठाकर अपने तुम

बस ख़ुशियाँ बिखेरे जाते हो

ना जाने मौन की भाषा में तुम

क्या-क्या ही समझा जाते हो

जब तक रहते हो साथ में तुम 

केवल मुस्काके देखे जाते हो

कभी सामने भी आ जाते ग़र

हम चरणों में सजदा कर लेते

तेरी बिखरी है रहमत जो यहॉ 

उससे अपना दुपट्टा भर लेते

मैं क्या कुछ बतलाऊँ मेरे गुरुवर

अच्छा लगता है मुझको कितना

जैसे चॉद से तारों को घर लाकर 

पूरे ऑगन में कोई बिखेरे जितना

                     👣🙏🏻

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