याद तेरी आती है तब(आध्यात्मिक)-176
याद तेरी आती है तब,
चरणों को दबाती जाती हूँ ।
शरण में तेरी हूँ मैं दाता,
मन ही मन गीत सुनाती हूँ ।
---तुम तो एकटक देखा करते,
पास में आने वालों को ।
मेरी निगाहें देखा करती हैं,
तब तेरे ही चरणों को ।
---सिर तो झुका ही रहता है,
मन जाने कहॉ खो जाता है ।
दिल में कुछ घबराहट होती,
तेज़ धड़कता जाता है ।
---जब भी कभी सिर ऊपर करके,
तुमको मैं देखा करती हूँ ।
अधरों पर मु्स्कान देखकर,
मैं भी पुलकित हो उठती हूँ ।
---मेरी पुलकन में हरदम प्यारे,
तुम ही झॉका करते हो ।
तभी तो हरदम सँग में मेरे,
हरपल तुम ही रहा करते हो ।
.......मुझको सहारा देते हो ।
👣🙏🏻
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें