रँगत(आध्यात्मिक)-171

रँगत में तेरी कुछ अलग ही रँगत

ख़याल-ओ-ख़्वाब में अलग ही चाहत

देखी हैं तुमने भी कितनी ही शिद्दत

फिर भी बिखेरी हैं ख़ुशियाँ ही अब तक

गले लगाया रोते हुओं को तुमने

पलकों बिठाया आशिक़ों को तुमने

महफ़िल तुम्हारी ये सजती रहेगी

शागिर्दों के मेले भी भरते रहेंगे

मन्नत और जन्नत, दुआ और फ़क़ीरी 

सलामती की दुआयें सब करते रहेंगे

दाता हो देने की आदत है तुम्हारी

लेने सभी कुछ न कुछ आते रहेंगे

                     👣🙏🏻

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