तुम चाहते हो जोड़ना(आध्यात्मिक)-167

तुम चाहते हो जोड़ना

तभी तो जुड़ पाता है कोई

वर्ना बिसात क्या कि

संसार को छोड़ पाये कोई

कभी रिश्ते-कभी यारी

कभी अपने-कभी सपने 

कोई न कोई फँसाये

रखता है जाल में अपने

और तो और धन भी

खींचा करता है अपनी ओर

कितने लुभावने आकर्षण हैं

इस मायावी दुनिया के

तुम ही खींच सकते हो 

सबसे छुड़ाकर मुझको

मेरे प्यारे गुरुवर

         👣🙏🏻


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