यादें(व्यक्तिगत)-168

यादें ही जीवन का फ़लसफ़ा होती हैं

अच्छी हों तब भी-बुरी हों तब भी

अपने-अपने नज़रिये से

सबमें ही कुछ न कुछ ख़ूबियॉ हैं

जो याद आने को मजबूर 

कर दिया करती हैं

किसको कहें पराया

सभी तो अपने हैं

सुख हो या दुख हो 

सभी के अपने सपने हैं

अच्छी यादें अच्छी बातें 

ख़ुशनुमा हो जाती है

बुरी यादें बुरी बातें 

दिलों को दुखा के जाती हैं

अक्सर एक रँग-बिरंगी छोटी सी चिड़िया

अपनी प्यारी आवाज़ से अलसुबह

मुझे उठाने आ जाती है

आज मैं बहुत दूर हूँ उससे

लेकिन वो ज़रूर आती होगी

मुझसे मिलने मुझे उठाने

ये सोचकर मुझे बहुत याद आती है

उस नन्हीं सी जान प्यारी सी दोस्त की

वो भी ज़रूर याद करती होगी मुझे

                    💔💔🖤💔💔

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