जिन पर तू रहमत बरसाता(आध्यात्मिक)-183
जिन पर तू रहमत बरसाता,
दर्द भी उनको दिया करता है ।
शायद इसीलिये तो प्यारे,
तू मुझको प्यार किया करता है ।
--सब कहते है तेरे दर पर,
ख़ुशियों का आलम रहता है ।
उन ख़ुशियों के आलम से,
ख़ुशियाँ तू बॉटा करता है ।
--तेरे प्यार और विरह की गाथा,
अब तक सबने ही गाई है ।
साथ में जुड़ा रहा तू जिससे,
उसने जगकर रात बिताई है ।
--नींद कहॉ ऑखों में उसकी,
तू ही तू दीखा करता है ।
घुटने टिकाकर हाथ उठाकर,
वो दुआयें मॉगा करता है ।
--तेरे चाहने वालों की परछाईं,
पड़ जाये जो सूखी डालों पर ।
तेरे करम से ख़ुशहाली हो,
दुनिया के ज़र्रे-ज़र्रे पर ।
👣🙏🏻
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