ध्यान में(आध्यात्मिक)-170

ध्यान में हरदम सूरत तेरी,

क्या ही ग़ज़ब ढाया करती है।

तन भले ही जीर्ण-शीर्ण हो,

मन को फ़ौलाद बनाती है।

--तनिक कहीं से छाया अँधेरी,

   इस मन को ना छूने पाये ।

    तभी तो तन और मन दोनों पर,

     हरपल नूर की वारिश होती है ।

--ध्यान गुरु का करने का ये

   फ़लसफ़ा बहुत ही अच्छा है।

    जो मॉगो वो मिलता है और

     मन आनन्द में हरपल रहता है।

--तुम्हें ध्यान कर तुम्हें प्यार कर,

    कितना कुछ हमने पाया है ।

    गूँगे का गुण हो गई वाणी,

     शब्द नहीं कुछ कह पाया है।

                         👣🙏🏻

        

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