मेरी निराली गुरुमाता(आध्यात्मिक)-172
नव दुर्गा के इन रूपों में,
दुनिया में तुम बसती हो मॉ ।
तेरा रुप अजब ही निराला है,
हम सबको प्यार लुटाती मॉ ।
--मुझे तेरा भी तो ख़याल है ये,
कहकर तुमने बुलवा ही लिया ।
करुणा की मूरत हो न्यारी,
करुणामई मेरी प्यारी मॉ ।
--श्रध्दा विश्वास न हिल पाये,
जब याद किया दौड़ी आईं ।
औलाद की ख़ातिर ही तो तुम,
इतना सब कष्ट उठाती मॉ ।
--तुम जानती हो मुझको जबसे,
जब मॉ के गर्भ में डाला था ।
तब से ही सताती आई तुम्हें,
तुम फिर भी गले लगाती मॉ ।
--तुम अच्छी तरह समझती हो,
अपनी सारी सन्तानों को ।
कोई और जगह नहीं ले सकता,
तुम-तुम ही हो मेरी गुरुमाता ।
.......... हो सबसे निराली मेरी मॉ ।
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