आओ कन्हैया मेरे दाता(आध्यात्मिक)-194

आओ कन्हैया मेरे दाता

तुमको आज बुलाती हूँ 

भोग बने हैं तरह-तरह के

अपने हाथों तुम्हें खिलाती हूँ

खाने के शौक़ीन बहुत तुम

कितना कुछ तुमने सिखलाया

जो भी कमियॉ खाने में होती

बड़े प्यार से तुमने बतलाया

जो भी भोग लगाने आता

वो ही भोग लगा लेते

लाने वाला ख़ुश हो जाता

तुम भक्ति भाव बढ़ा देते

मेरे कन्हैया तुमको अभी भी

सबको ख़ुश रखने की आदत है

रूखा-सूखा भी भोग लगाकर

पूरी करते भक्तों की चाहत है

तुम्हारे सामने कह ना पाती

मैं तुम्हें खिलाते डरती हूँ

सबको खिलाने के शौक़ीन कन्हैया

तेरी इसी अदा पर मरती हूँ

                👣🙏🏻


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