गुरुवर मेरे तुम कहते हो(आध्यात्मिक)-193
गुरुवर मेरे तुम कहते हो,
देना-देना सिर्फ़ ही देना ।
तुम्हें चाहिये जो कुछ भी,
वह सबको देते ही रहना ।
अन्न चाहिये अन्न ही देना,
धन चाहिये धन बॉटो ।
जो-जो कुछ भी तुम्हें चाहिये,
पहले बॉटो फिर मॉगो ।
केवल-केवल मॉगते रहते,
यही तो सब भी करते हैं ।
पहले कभी न बॉटकर आये,
अब वो ही मॉगा करते हैं ।
हमने तो पहले तुम सबको,
बोना-काटना सिखाया है ।
फिर भी तुमको समझ न आती,
जो सिद्धान्त बताया है ।
बोओ और काटो यही विधा है,
अच्छा जीवन जीने की ।
जिस दिन तुम्हें समझ आयेगी,
बोओगे तुम अच्छा ही ।
गुरुवर मेरे तुम भी क्या हो....?
क्या कुछ सिखला जाते हो ।
छोटी-छोटी बातों में ही,
बड़ी बात कह जाते हो ।
👣🙏🏻
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