ऑखिन देखी(सामाजिक)-189

बड़े शहर के बड़े विभाग के

बड़े अफ़सर पति-पत्नी दोनों ही

अब काफ़ी समय से रिटायर हैं

बहुत बूढ़े हो गये हैं दोनों ही

चार बेटियाँ शादीशुदा 

बेटा नहीं एक भी

ख़ुद के फ़्लैट में अकेले रहते हैं

याददाश्त चली गई है दोनों की

कामवालियॉ जो आतीं थीं काम पर

सोसायटी मेम्बरान से शिकायत की

अब काम नहीं कर सकतीं

पूरा घर गन्दा पड़ा है,

आन्टी अँकल को होश नहीं ख़ुद का भी

चारों बेटियों को बुलाया गया

सलाह मशविरा हुआ

कोई न तो साथ ले जाने को तैयार

और न ही कोई केयरटेकर रखेंगी

आख़िर फ़ैसला बड़ी ने ही लिया 

समझदारी से

अनाथाश्रम में डाल दिया मॉ-बाप को

प्रॉपर्टी बेचकर पैसा चारों ने बॉट लिया

चली गईं अपने-अपने घर

कामवाली मुझे एक कोरी साड़ी दिखाकर

रोती हुई कहती है-आन्टी बहुत अच्छी थीं

उन्होंने ही मुझे दी थी जब होश में थीं

आज कहॉ हैं-कैसी हैं-कैसे पता करूँ ?

बताओ ना आन्टी-आप ढूँढकर 

दर्शन करा दो न उनके

मैं सोचने पर मजबूर हो गई

कि क्या.....बेटियाँ....ऐसा भी

कर सकती हैं.....

मॉ और बाप के साथ ?

                       💔💔🖤💔💔





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