तूने जो छेड़े तार(आध्यात्मिक)-166

तूने जो छेड़े तार,मुझको क्या हो गया ।

मन में हुई झँकार,ऐसा क्या हो गया ।

--झूमती रहती हूँ मैं,हर पल नशे में चूर ।

  प्यार का सा ये नशा,आज मुझको हो गया ।

--दर पर तुम्हारे भीड़, कितनी लगी है आज ।

  फिर भी निगाहों से,पर्दा आज हट गया ।

--झीनी सी चादर थी, बस तेरे-मेरे दरमियाँ ।

  हल्का सा कोना आज,ख़ुद-ब-ख़ुद हट गया ।

                           👣🙏🏻


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