ऑखिन देखी(सामाजिक)-190

एक ही चिराग है केवल उस घर में

वह भी बग़ावत पै उतारू है

कहता है अकेला वारिस हूँ तुम्हारा

वसीयत क्यों नहीं कर देते अभी

मॉ से कराकर ज़बरन चैक पर साइन

लाखों रुपये निकालकर कहता है

बोल क्या कर लिया तूने....?

कल ही मॉ ने दम तोड़ दिया

दम क्या....? भरोसा जो टूटा था उसका

बाप दम तोड़ने की दहलीज़ पर खड़ा है

बेटा जायदाद नाम कराने पै अड़ा है

पता है आगे और पीछे भी 

है सभी उसी के लिये

धन कमाने की दौड़ में 

सारे बाक़ी रिश्ते कहीं दूर छूट गये

जिस बेटे की ख़ातिर रिश्तों को 

सबसे तोड़ा था

आज वही इकलौता वारिस

तोड़ रहा है उन्हें 

जानता है चन्द दिनों के मेहमान हैं ये भी

लेकिन वक़्त से पहले 

दुनिया से चले जाने को

बोल रहा है वो भी

तभी तो उसको..

पैसा व जायदाद चाहिये

मॉ-बाप नहीं 

        💔💔🖤💔💔


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

याद आपकी-428

दृष्टा-425

कर्म -426