नारी की सच्चाई(सामाजिक)-186

--आवारा की तरह घूमती रहती हो

--ये कपड़े क्या पहन रखे हैं उतारो इनको

--शाम होने से पहले जल्दी घर लौट आना

--बदज़ुबानी मत किया करो

--पराये घर जाकर नाक कटाएगी

--ज़्यादा पढ़ा-लिखाकर क्या करेंगे

--बाद में तो चूल्हा-चौका ही संभालना है न

--लड़कों से दोस्ती अच्छी नहीं होती

--सीना तानकर क्यों चलती हो

--सिर को झुकाकर चलना सीखो

सोचती हूँ ऐसी बहुत सी बातें 

हमारा समाज लड़कों को भी

क्यों नहीं सिखाता......जैसे

--अपने से बड़ों को सम्मान देना सीखो

--लड़कियों की इज़्ज़त करना सीखो

--बेटी भी उतनी ही आज़ाद है जितना तुम

--अपने पैरों पर खड़ा होना सीखो

--घर के कामों में हाथ बटाना सीखो

--अपनी ग़लती मानना सीखो

--चीख़ना चिल्लाना बन्द करो

--ससुराल वालों को सताना बन्द करो

--भिखारी हो क्या...जो दहेज लोगे 

मेरी गुज़ारिश है कि अगर नारी सम्मान की बातें की

जाती हैं तो व्यवहार में भी समानता लानी ही होगी।


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