बियाबान जंगल में देखो(आध्यात्मिक)-336
बियावान जँगल में देखो ,
खिलते फूल गुलाब के ।
उजड़े चमन में कैसे यारों ,
आ जाती है बहार भी ।
केवल...केवल कृपा तुम्हारी ,
चारों ओर बरसती है ।
मेरे कान्हा तभी तो मीरा.....,
घुँघरू बॉध नाचती है ।
बुझे-बुझे से दिलों में प्यारे ,
तू ही भरता उत्साह है ।
तभी तो कुछ ऐसा कर जाते...?
सब कहते बिन्दास है ।
तेरी इनायतें ....तेरे करम से ,
क्या से क्या हो जाता है ।
अदना सा .....साधारण बन्दा..,
बड़े काम भी कर जाता है ।
तू तो केवल भाव पकड़ता ,
और न तुझे कुछ भाता है ।
वँशी की धुन सुनकर कान्हा ,
सारा गॉव उमड़ आता है ।
ऐसा ही कुछ प्राण...भाव में...,
मेरे भी तुम आज डाल दो ।
शरण में तेरी पड़ी रहूँ बस ,
मुझमें इतनी जान डाल दो ।
......दाता अपना प्यार डाल दो।
.....गुरुवर तुम उल्लास डाल दो।
👣🙏
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