फूलों की रंगत है पीली(आध्यात्मिक)-271

फूलों की रंगत है पीली,
छा गया बसन्त है ।
तन-मन मेरा सब रंग डाला,
पीले रंग में आज है ।

चारों ओर गीतों की धुन से,
हुआ तुम्हारा स्वागत है ।
कैसे बताऊँ मैं प्यारे दाता,
ख़ुशियों की आज बहार है ।

दिले बहारें,दिली तमन्ना,
दिले आरज़ू,सब कुछ है ।
साथ हमारा बना रहे बस,
सदियों से जो अब तक है।

प्यार तुम्हारा,साथ तुम्हारा,
मिलता रहेगा,जब तक भी ।
तब तक काया काम करेगी,
जैसे भी चाहो,जब तक भी ।

तुम तो शायद भूल गये वो,
हर बसन्त का आना-जाना ।
मुझको हरदम याद है आता,
दौड़ के तुमसे मिलने आना ।

कपड़े पीले,फूल भी पीले,
सब कुछ पीला-पीला है ।
आज भी तेरी राह देखती,
ऑखों का रँग गीला है....।
......लाल गुलाबी ना होकर,
        .........वो पानी के रँग जैसा है ।

                              👣🙏🏻
                        23/1/18
               

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