आ जाता है वो याद कभी(आध्यात्मिक)-269
आ जाता है ..वो याद कभी,
जो वक़्त गुज़ारा चरणों में ।
बिन मॉगे बरसती रही कृपा,
जब सजदा किया इन चरणों में ।
तू क्या जाने...कैसे-कैसे,
मैं तड़पी हूँ और रोई हूँ ।
जब भी तू मुझसे रूठा है,
मैं तुझे मनाने दौड़ी हूँ ।
मैं जब भी कभी रूठी तुमसे,
झट अब्बा हो जाया करते ।
फिर किसी न किसी बहाने तुम,
मुझको बुलवाया ही करते ।
इतना अपनापन कौन....भला,
अब दे सकता है क्यूँ मुझको ।
अब रूठ अगर ग़लती से गई,
तो...सब छोड़ चले जाते मुझको ।
बस प्यार तुम्हारा ही सच्चा है,
बाक़ी तो प्यार दिखावे हैं ।
कितने ही बड़े-बड़े ये रिश्ते,
इस दुनिया के ख़ूब छलावे हैं ।
मैं इसीलिये तो कहती हूँ,
थामे मुझको तुम ही रहना ।
जन्मों से भटकी आई हूँ,
अब और न मुझको भटकाना ।
.......तुम रूठ न अब मुझसे जाना ।
👣🙏🏻
24/1/18
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